Osteoporosis (हड्डियों का कमज़ोर होना)


Osteoporosis (हड्डियों का कमज़ोर होना)

Osteoporosis नामक रोग में हड्डियों की घनिष्टता में कमी आ जाती है जिससे वे मामूली कारण से ही टूटकर चटक जाती है. साधारण छींकने की क्रिया से भी हड्डियों में दरार हो जाना इस रोग का लक्षण हैं. यह रोग शरीर में वात के बिगड़ने से होता है. वात प्रकृति में ठंडा तथा रुक्ष होता है, इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए कफ के स्निग्ध गुण का उपयोग किया जाता है. व्यक्ति को दिन में 3 से 4 बार प्राकृतिक कॅल्षियम युक्त आहार का सेवन करना चाहिए.





रोग के कारण (Causes of Osteoporosis In Hindi)
महिलायों में यह समस्या पुरुषों के मुक़ाबले ज़्यादा पाई जाती है.बाल्यकाल और तरुण अवस्था में कॅल्षियम-युक्त पौष्टिक भोजन का यथोचित सेवन करने से osteoporosis की समस्या बुढ़ापे में होने की संभावना कम हो जाती है.परिवार में आनुवांशिक कारणों से भी यह रोग अधिक होने की संभावना बढ़ जाती है.यदि पहले से ही हड्डियों का ढाँचा कमज़ोर और छोटा है तो यह समस्या प्रबल रूप ले सकती है.मेनोपॉज़ के समय में महिलायों के हारमोन एस्टरोगेन (estrogen) में कमी आ जाने से भी कॅल्षियम (calcium) का रिसाव हड्डियों में से होकर उन्हें शिथिल बना देता है.इसके अलावा थायरॉइड (thyroid) हारमोन की अधिकता से भी अस्टईयाप्रोसिस (osteoporosis) की शिकायत बढ़ जाती है. पैराथायरॉइड (Parathyroid) और अन्य अंतः स्त्राविय ग्रंथियों के असंतुलन से भी यह समस्या उत्पन्न होती है. इसलिए अंतःस्त्रावी तंत्र का स्वास्थ भी अति अनिवार्य है.
इसके अलावा खुराक और जीवन शैली में कमी के कारण भी यह रोग उत्पन्न होता है. जिन लोगों के भोजन में कॅल्षियम की मात्रा शरीर की आवश्यकता से कम हो, उससे भी अस्टईयाप्रोसिस की बीमारी का प्रकोप बढ़ता है. जिन लोगों में ख़ान-पान संबंधी रोग जैसे की anorexia या bulimia पाए जाते है, उन व्यक्तियों में इस रोग के होने की प्रबल संभावना रहती है.इसके अलावा जिन लोगों में जठरांत्रिय-संबंधित (gastrointestinal operation) ऑपरेशन हुआ हो, उनमें इस रोग के होने की संभावना अधिक होती है. इसका कारण है कि उनमें कॅल्षियम को जस्प करने की क्षमता कम हो जाती है.स्टेराइड्स (steroids) और कुछ विभिन्न प्रकार के रोगों के निदान के लिए उपयुक्त दवाइयों (कॅन्सर, अपस्मार) के प्रयोग से भी यह समस्या व्यक्ति के शरीर में उत्पन्न होती है. अन्य कारण जैसे ज़्यादा समय बैठ कर काम करने से, शराब के अधिक सेवन, और तंबाकू के प्रयोग से यह रोग शरीर में प्रकट हो जाता है.


औस्तियोपोरोसिस में भोजन (Diet in Osteoporosis In Hindi)
वात को शांत करने वाले भोजन का सेवन रोगी के लिए पथ्यकर है.तिल का सेवन रोग के उपचार में बहुत महत्व रखता है. यह एक संपूर्ण पुष्टिदायक पदार्थ है जिससे शरीर को कॅल्षियम की भरपूर मात्रा सहज से मिल जाती है. गर्मियों में एक चम्मच तिल रात्रि को भिगोकर रख दें . प्रातः काल पानी निकाल कर तिल को अच्छी तरह चबाकर खा लें. सर्दियों में तिल का सेवन बिना पानी में भिगोये ही करें. यदि इसके साथ दूध का सेवन भी किया जाए तो यह बहुत लाभ देता है.
नाश्तें में ऋतु अनुसार ताज़ें फलों का सेवन करना चाहिए.दोपहर के भोजन में छिलके वाले चावल, मुंग की डाल, भिंडी, अदरक और जीरे वाली लस्सी का सेवन करना हितकर है.चौलाई और पालक तथा अन्य सब्जियों से बना सूप इस रोग के निदान में बहुत उपयोगी है. इस सूप में ब्लॅक बीन्स (blackbeans) डालने से इसकी पौष्टिकता और गुणवत्ता बढ़ जाती है.रात्रि के समय केसर- और बादाम युक्त दूध का सेवन करना अत्यंत लाभकारी है. सर्दियों में इस प्रयोग में दूध में खजूर भी मिलाया जा सकता है.आयुर्वेद के अनुसार एलाईची, दालचीनी, अदरक, काली मिर्च, हल्दी और लौंग मिश्रित देसी गाय के दूध का सेवन करना चाहिए जो शरीर के लिए लाभदायक है. इस रोग में वात रोग को शांत करना अत्यंत आवश्यक है.


Osteoporosis में प्रयोग होने वाली औषधियाँ (Osteoporosis Remedies In Hindi):
अम्लकि: इस औषधि के प्रयोग से शरीर की सभी अंगों की पुष्टि होती है तथा यह डिकॉक्षन, चूर्ण या मीठे औषधीय द्रव्य के प्रयोग से होते हैं.
त्रिफला: यह आयुर्वेदिक फ़ॉर्मूला जिसमें अमला, हरतकी और बिभतकि का प्रयोग होता  है.  हड्डियों के रोगों के निवारण में ये बहुत प्रयोगशील औषधि है.
गुग्गूल: कोलेस्टरॉल को घटाने में प्रयोग होने वाली यह औषधि tumors को घटाकर हड्डियों की घनिष्टता को बढ़ाने में सहायता करती है. इस रोग में अस्तीवात स्रोतों पर भी निषेधात्मक असर पड़ता है तथा इसके अलावा भोजन में प्रयोग से वात तथा इससे संबंधित दोषों के निवारण अत्यंत हितकर है.
आंजेलिका (Angelica): आयुर्वेदिक और चीनी पद्धति में उपयोग होने वाली यह औषधि मेनोपॉज़ (menopause), अस्टईयाप्रोसिस (osteoporosis) और महिलयों से संबंधी अन्य रोगों के निदान में लाभदायक है.
प्रवाल: लाल मोंगा से बना प्रवाल शरीर में जस्प होने वाले कॅल्षियम का भरपूर स्रोत है. यह मोंगे को जलाकर उसकी राख से निर्मित किया जाता है.
हॉर्स्टेल (Horsetail): इस औषधि का प्रयोग भी खून को बहने से रोकने के लिए होता है तथा यह पेशाब की मात्रा में वृद्धि कारक भी है . इससे हड्डियों की मजबूती में भी वृद्धि आती है तथा rheumatic arthritis नामक रोग की निवरत्ति में भी सहायता मिलती है. कुछ प्रयोगों के अनुसार इस औषधि में मौजूद सिलिकन (silicon) पदार्थ से हड्डियों के निर्माण में सहायता मिलती है.
कंफ्री रूट (Comfrey root): इस औषधि से घाव को भरने , मोच, और टूटी हुई हड्डियों के जुड़ने में सहायता मिलती है.



रोग निदान में प्रयोग होने वाले अन्य उपचार (Osteoporosis Panchkarma Treatment In Hindi)
बस्ती का प्रयोग शरीर में वात अथवा वात संबंधित प्रादुर्भाव को रोकने के लिए किया जाता है. इस प्रयोग के करने से पोशाक तत्वों को शरीर में जस्प किया जाना आसान हो जाता है. औषधीय तेल तथा herbs में बस्ती का प्रयोग करना अत्यंत लाभकारी है. इससे आम या जीववीश को शरीर से निकालने में सहायता मिलती है और शारीरिक कोषों का पुनर्निर्माण होता है.
इसके अलावा नियमित हल्की मालिश से भी शरीर का वात शांत होता है और हड्डियों को तथा अन्य सब अंगों को पुष्टि मिलती है. बादाम, तिल या सरसों के तेल से शरीर पर नियमित रूप से रीढ़ की हड्डी, सिर और पैरों में मालिश से शरीर को अत्यंत लाभ प्रदान करती है. 30 मिनिट रोज़ योगाभ्यास और इतने ही समय का प्राणायाम शरीर को पुष्ट करता है. परंतु योगासनों को करते समय तेज़ गति वाले प्रयोग नही करने चाहिए तथा इनका अभ्यास किसी कुशल योगचार्य की दिशानिर्देश में ही करें

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