कंधे में दर्द (Shoulder pain)

कंधे में दर्द (Shoulder pain)
परिचय:-
वैसे देखा जाए तो कंधों में आर्थराइटिस नहीं पाया जाता है। जब जोड़ों की सरंचना किसी कारण से प्रभावित होती है तो कंधे में दर्द होने लगता है। कंधे में दर्द होने के कारण रोगी व्यक्ति को चलने-फिरने में भी परेशानी होने लगती है।
          कंधे सुन्न पड़ जाने की बीमारी 50 से 75 वर्ष की उम्र के स्त्री-पुरुषों में अधिक पाई जाती है। दर्द के कारण कंधा निष्क्रिय पड़ जाता है।
कंधे में दर्द होने का लक्षण:-
          इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति के कंधे में दर्द होता है तथा उसका कंधा सुन्न पड़ जाता है। रोगी को कंधे में अकड़न भी होने लगती है और जब दर्द तेज हो जाता है तो रोगी व्यक्ति को नींद भी नहीं आती है।
कंधे में दर्द होने का कारण:-
          कंधे के जोड़ तथा इसकी संरचनाओं का तन्त्रिका वितरण मुख्य रूप में पांचवी ग्रीवा-मूल के माध्यम से होता है जो ग्रीवा-कशेरुका से निकलती है। यह कंधे की जड़ तथा ऊपरी बांह के ऊपर फैली हुई त्रिकोणिका मांसपेशी के क्षेत्र में निहित होती है इसलिए अधिकतर इसमें दर्द महसूस होता रहता है।
कंधे में दर्द होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-
कंधे के दर्द को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को सबसे पहले अपने कंधे की मालिश करानी चाहिए तथा गर्म व ठंडी सिंकाई करवानी चाहिए ताकि यदि कंधे के पास की रक्त कोशिकाओं में रक्त जम गया हो तो उस स्थान पर रक्त का संचारण हो सके। इसके फलस्वरूप कंधे का दर्द ठीक हो जाता है।रोगी के कंधे के दर्द से प्रभावित भाग को सूर्य की किरणों के पास करके सिंकाई करनी चाहिए क्योंकि सूर्य की पराबैंगनी किरणों में दर्द को ठीक करने की शक्ति होती है। फिर रोगी व्यक्ति को कंधे पर ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा इसके बाद उस पर मिट्टी की पट्टी का लेप करना चाहिए। इसके फलस्वरूप कंधे के दर्द का रोग ठीक हो जाता है।रोगी व्यक्ति को रात के समय में कम से कम 1 घण्टे तक ठंडा लेप कंधे पर करना चाहिए। इसके फलस्वरूप कंधे का दर्द तथा अकड़न ठीक हो जाती है।इस रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को सुबह के समय में व्यायाम करने से लाभ होता है।इस रोग से पीड़ित रोगी को मांस, मछली तथा अन्य मांसाहारी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
जानकारी-
          इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से रोगी व्यक्ति का कंधे का दर्द ठीक हो जाता है।


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